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बुधवार, 17 अप्रैल 2013

हम गैर को सतायेंगे गुजरात की तरह !


गुजरात माडल की बात ऐसे की जा रही है मानो विकास नाम की चिड़िया लाशों से दाना-पानी लेती हो फिर भी पूज्य है. पुरानी बातें भुलाने की बातें कुछ यों की जाती हैं जैसे वह कई सदी पुरानी बात हो. बाबर का बदला जुम्मन से लेने को आतुर लोग मोदी और उसके गिरोह के लोगों पर अदालती कार्यवाही को भी कटघरे में खड़ा करते हैं. ऐसे में आनंद कुमार द्विवेदी की यह ग़ज़ल उस स्मृति को न केवल ताज़ा करती है बल्कि उसे बनाए रखने की वजूहात को भी साफ़ करती है.








हम रामराज लायेंगे गुजरात की तरह
 
इस देश को बनायेंगे गुजरात की तरह 

बस एक बार होंगे जो होने हैं फ़सादात 
झगड़े की जड़ मिटायेंगे गुजरात की तरह 

अपराध नहीं पनपेगा, मुज़रिम न बचेगा 
सबको सज़ा दिलायेंगे गुजरात की तरह 

क्या कीजियेगा रंग-रंग के गुलों का आप 
कुछ रंग हम हटायेंगे गुजरात की तरह 

आतंकियों, जहाँ भी तुम्हारा मिला वजूद 
वो बस्तियाँ मिटायेंगे गुजरात की तरह 

पहले तमाम काम एजेंडे के करेंगे 
पीछे विकास लायेंगे गुजरात की तरह 

इस बार जो खायेंगे शपथ संविधान की 
फिर घर नहीं जलायेंगे गुजरात की तरह 

'आनंद' तू तो अपना है बेकार में न डर 
हम गैर को सतायेंगे गुजरात की तरह 


15 टिप्‍पणियां:

  1. शुक्रिया भाई... बस इन कुछ अक्षरों / शब्दों से मैं अपने बहुत सारे भाइयों का कर्ज़ कम करने की कोशिश कर रहा हूँ !

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  2. Waaaah बहुत ख़ूब...बेहतरीन रचना है सर...शेयर करने के लिये बेहद शुक्रिया...आनंद जी को बधाई...

    मेरी माँ जोधा से कह दो मिट गये बच्चे तेरे
    थे हमारे ताज जितने, सब अजायबघर गये

    -SIRAJ FAISAL KHAN

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  3. shndaar Gazal se adhik ise samecheen gazal kahna chahiye ! bahut shukriya
    हम रामराज लायेंगे गुजरात की तरह
    इस देश को बनायेंगे गुजरात की तरह

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  4. पहले तमाम काम एजेंडे के करेंगे
    पीछे विकास लायेंगे गुजरात की तरह ...वाह वाह ...

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  5. वाह वाह ...पहले तमाम काम एजेंडे के करेंगे
    पीछे विकास लायेंगे गुजरात की तरह

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  6. विकसित भारत की तस्वीर दिखायेंगे गुजरात की तरह. धर्म और उद्योग पनपायेंगे गुजरात की तरह.

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  7. इस ग़ज़ल को पढ़कर मैं भी गुजरात हो गया हूँ.... आनंद भाई का आभार इतनी बेधक रचना के लिए।

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  8. वाह भाई बहुत ही मौजू गजल है ...

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  9. bahut khoob माया कोदनानी को मंत्री बनायेगे
    फिर उसे फांसी के लिए जोर भी लगायेगे
    वह भी तब जब पेटीशन की अवधि बीत चुकी हो ड्रामे बाज ......और लोग अभी भी यह कह रहे है की वाजपयी जी ने राज धर्म की बात कही थी उस समय कौन सा राज धर्म था

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